Meaning of

मुहिब

muhib • محب

प्रेमी; प्रिय

lover; beloved

محب; محبوب

Arabic

हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं

212

Download Image

तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

Download Image

शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं

841

Download Image

मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है
अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है

किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया
ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है

569

Download Image

सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ

553

Download Image

उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था
ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी

362

Download Image

घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

296

Download Image

वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं
उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़

267

Download Image

अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

221

Download Image

ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में
मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता

चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है
पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता

214

Download Image

हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं

212

Download Image

तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

Download Image

मुहिब प्रेम और भावनात्मक संबंध की गहराई का एहसास कराता है। कविता में, यह अक्सर प्रेमी की भक्ति और प्रिय की आकर्षण का प्रतीक होता है, जो लालसा और संतोष की एक बुनावट बनाता है।

कवि अक्सर मुहिब का उपयोग प्रेम और भक्ति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी की भावनाओं की तीव्रता या प्रिय की चुंबकीय आकर्षण को व्यक्त कर सकता है।

मुहिब प्रेम की कोमल गले लगाने की भावना को पकड़ता है, लालसा और संतोष के बीच का एक नृत्य।