Meaning of

नाफ़

naaf • ناف

नाभि; केंद्र; मूल

navel; center; core

ناف; مرکز; جوہر

Arabic

बन जाते हैं अपनी ग़रज़ की ख़ातिर आशिक़ लोग
मेरी नज़र में हैं कुछ ऐसे भी मुनाफिक़ लोग

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मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है

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हम ने सोचा है इस के बारे में,
कुछ मुनाफ़ा है इस खसारे में

मैं तो ख़्वाबों से तर्क करता था,
कुछ न कुछ बात है तुम्हारे में

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आजकल के शाइरों तुम शा'इरी तो सीख लो
है तनाफ़ुर क्या शिकस्त-ए-नारवा क्या चीज़ है

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मुनाफ़िक़ के चेले किए जा रहे हैं
अजब कारना
में किए जा रहे हैं

नमाज़ें तो इनसे अदा हो न पाई
मज़ारों पे सज़दे किए जा रहे हैं

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बस एक बार हो तेरी निगाह मेरी तरफ़
फिर उस के बा'द मुझे कोई शै नहीं दरकार

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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किया है इश्क़ तो इस
में मुनाफ़ा क्या ख़सारा क्या
फ़क़त हम तो इसे ईनाम का उनवान देते हैं

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अच्छा तो है बहुत पर मन से नहीं गया है
भीतर गया मगर वो उतने नहीं गया है

मैं ने मुनाफ़िक़ों को बाहर किया है ख़ुद ही
वो शख़्स ज़िंदगी से ऐसे नहीं गया है

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मुनाफि़कों की बहुत ही तवील थी फहरिस्त
जो उस को परखा तो इक नाम और उभर आया

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बन जाते हैं अपनी ग़रज़ की ख़ातिर आशिक़ लोग
मेरी नज़र में हैं कुछ ऐसे भी मुनाफिक़ लोग

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मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है

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'नाफ़' शब्द नाभि का संकेत करता है, जो जीवन और सृजन का केंद्रीय बिंदु है। कविता में, यह अपने भौतिक अर्थ से परे जाकर अस्तित्व के मूल, जीवन के उद्गम और व्यक्ति के केंद्र का प्रतीक बन जाता है। यह ब्रह्मांड और आत्मा से जुड़ाव की भावना को जागृत करता है।

कवि 'नाफ़' का उपयोग उत्पत्ति और पहचान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह यात्रा के प्रारंभिक बिंदु या व्यक्ति के सार का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द अक्सर सृजन और जीवन की पारस्परिकता के रूपकों में प्रकट होता है।

अपने काव्य रूप में, 'नाफ़' हमारे उद्गम और जीवन के उस पारस्परिक जाल की याद दिलाता है जो हम सभी को बांधता है।