Meaning of

नाज़

naaz • ناز

गर्व; शान; सुंदरता

pride; elegance; grace

فخر; شان; خوبصورتی

Persian

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों
मोहब्बत करने वाला जा रहा है

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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब'
ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं

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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त

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किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए
मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है

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है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद

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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते

बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं
अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते

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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये

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कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यूँ नहीं जाते

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है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला

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नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों
मोहब्बत करने वाला जा रहा है

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नाज़ एक ऐसा गर्व है जो कोमल और सुंदर है। यह अपनी महत्ता की ऊँची घोषणा नहीं है, बल्कि अपनी सुंदरता की शांत और गरिमामयी स्वीकृति है। कविता में, नाज़ अक्सर आत्मविश्वास और विनम्रता के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाता है।

कवि नाज़ का उपयोग प्रिय की सूक्ष्म गर्व को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रकृति की सुंदरता या किसी क्षण की शांत गरिमा से जुड़ा होता है। नाज़ अहंकार के विपरीत है, जो मृदु आत्मविश्वास की सुंदरता को उजागर करता है।

नाज़ आत्म-जागरूकता की शांत शक्ति है, अपनी महत्ता की कोमल याद दिलाता है।