Meaning of

निसा

nisa • نسا

महिलाएँ; स्त्रियाँ

women; females

عورتیں; خواتین

Arabic

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ

53

Download Image

पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें
ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम

129

Download Image

लिख के उँगली से धूल पे कोई
ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई

याद कर के किसी के चेहरे को
रख गया होंठ फूल पे कोई

77

Download Image

इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो

75

Download Image

तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा

68

Download Image

मेरी नम आँखों में सावन देखते हैं ये
उम्र भर रोते रहो इनको हँसाने में

62

Download Image

मैं तो सफों के दरमियाँ कब से पड़ा हूँ नीम जाँ,
मेरे तमाम जाँ निसार मेरे लिए तो मर गए

62

Download Image

सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है
शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है

वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो
वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है

62

Download Image

हद से ज़्यादा भी प्यार मत करना
जी हर इक पे निसार मत करना

क्या ख़बर किस जगह पे रुक जाए
साँस का ए'तिबार मत करना

57

Download Image

मैं तुझे खो के भी ज़िंदा हूँ ये देखा तू ने
किस क़दर हौसला हारे हुए इंसान में है

54

Download Image

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ

53

Download Image

पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें
ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम

129

Download Image

अपने मूल अर्थ में, 'निसा' महिलाओं को संदर्भित करता है, जो स्त्रीत्व की भावना और समाज में महिलाओं की भूमिकाओं को समेटे हुए है। कविता ने इस शब्द को सुंदरता, शक्ति और महिलाओं द्वारा अक्सर धारण की जाने वाली मौन सहनशीलता के विषयों को खोजने के लिए अपनाया है।

'निसा' का उपयोग कवि अक्सर स्त्रीत्व की गरिमा और रहस्य को उजागर करने के लिए करते हैं। यह जीवन के पोषणकारी पहलू या विपत्ति में पाई जाने वाली मौन शक्ति का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द पुरुषवादी छवियों के साथ विपरीतता में भी प्रयोग किया जा सकता है ताकि लिंग गतिशीलता को उजागर किया जा सके।

कविता में, 'निसा' स्त्रीत्व की गहन गहराइयों का पता लगाने के लिए एक माध्यम बन जाता है। यह शक्ति और संवेदनशीलता के नाजुक संतुलन पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।