Meaning of

रुक्न

rukn • رکن

स्तंभ; सहारा; आधार

pillar; support; cornerstone

ستون; سہارا; بنیاد

Arabic

बस भरम दरकिनार कर दें तो
कौन तन्हा नहीं है दुनिया में

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कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा

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सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा
सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा

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तुम्हारे ख़त को जलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
ये दिल बाहर निकलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है

तुम्हारा फ़ैसला है पास रुकना या नहीं रुकना
मेरी क़िस्मत बदलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है

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करना गर पड़े बे-पर्दा हमें उसे साबिर
हम तो ऐसी शोहरत से दरकिनार करते हैं

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बीच सफ़र में यूँँ रुकना बतलाता है
बिन मतलब के साथ नहीं चलता कोई

सानी कैसे मिल जाएगा फिर तुम को
मेरा तो हमनाम नहीं मिलता कोई

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ख़ुद का हम कितना ख़सारा करते
हम अगर इश्क़ दुबारा करते

मुड़ के गर तुम ने जो देखा होता
रुकने का हम भी इशारा करते

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झूठ कहते हैं यहाँ बाजार में बिकता नहीं कुछ
बेसहारा को सर-ए-बाज़ार बिकते देखा मैं ने

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हम ऐसे लोग जो रुकना ग़लत समझते थे
फिर एक शख़्स पे ठहरे तो लाश हो बैठे

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कमाई बाप की सारी चली जाती है बेटों में
मगर बेटा उन्हीं को बेसहारा छोड़ जाता है

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बस भरम दरकिनार कर दें तो
कौन तन्हा नहीं है दुनिया में

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कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा

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'रुक्न' का मूल अर्थ एक मजबूत स्तंभ या सहारा है, जो भार को थामता है और स्थिरता प्रदान करता है। कविता में, यह शब्द अक्सर अपने भौतिक अर्थ से परे जाकर जीवन के भावनात्मक और नैतिक सहारों का प्रतीक बन जाता है, वे अदृश्य शक्तियाँ जो मानव आत्मा को थामे रहती हैं।

कवि अक्सर 'रुक्न' का उपयोग जीवन के आवश्यक सहारों के प्रतीक के रूप में करते हैं, चाहे वह प्रेम हो, विश्वास हो या मित्रता। यह नाजुकता और अस्थिरता के विपरीत, उन स्थायी तत्वों को उजागर करता है जो हमें बनाए रखते हैं।

'रुक्न' हमारे जीवन को थामने वाली अदृश्य शक्तियों का प्रमाण है। यह स्थिरता में मिलने वाली शक्ति की याद दिलाता है।