Meaning of

रुख़सार

ruksaar • رخسار

गाल; चेहरा

cheek; face

گال; چہرہ

Persian

दर्द की कैफ़ियत कैसे कह दें?
बूझो रुख़्सार पे झिलमिल क्या है

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है

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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ
ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने

तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें
तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने

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उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा

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सो देख कर तेरे रुख़्सार-ओ-लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी

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रुख़्सार पर है रंग-ए-हया का फ़रोग़ आज
बोसे का नाम मैं ने लिया वो निखर गए

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रुख़्सार का दे शर्त नहीं बोसा-ए-लब से
जो जी में तिरे आए सो दे यार मगर दे

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बोसा-ए-रुख़्सार पर तकरार रहने दीजिए
लीजिए या दीजिए इनकार रहने दीजिए

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ग़ज़ल पूरी न हो चाहे, मग़र इतनी सी ख़्वाहिश है
मुझे इक शे'र कहना है तेरे रुख़्सार की ख़ातिर

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दर्द की कैफ़ियत कैसे कह दें?
बूझो रुख़्सार पे झिलमिल क्या है

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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मूल रूप से 'रुख़सार' का अर्थ गाल होता है, जो सुंदरता और कोमलता का प्रतीक है। कविता में, यह भावनाओं का कैनवास बन जाता है, जहाँ लाली और आँसू प्रेम और तड़प की कहानियाँ बुनते हैं।

'रुख़सार' का उपयोग कवि अक्सर प्रिय के चेहरे की कोमल सुंदरता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह मासूमियत या पहले प्यार की लाली का प्रतीक हो सकता है। गाल अनकही भावनाओं का मौन संप्रेषक बन जाता है।

कविता की दुनिया में, 'रुख़सार' क्षणभंगुर पलों की क्षणिक सुंदरता को पकड़ता है। यह मानव चेहरे की मौन वाक्पटुता का प्रमाण है।