Meaning of

साग़र-ए-इश्क़

saaghar-e-ishq • خیرو

प्रेम का प्याला; जुनून का पात्र

cup of love; vessel of passion

محبت کا جام; جذبے کا ظرف

Persian

छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो
ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो

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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है
ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी

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हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब
उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं

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ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

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बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के
आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को

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यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई
बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं

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अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा
कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा

रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख
झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा

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सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था
देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया

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महल में नहीं गर तो बस्ती में मिलते
हक़ीक़त नहीं तो कहानी में मिलते

ये सर्दी तो तब भारी सर्दी में गिनते
तेरे बाल जब मेरी जर्सी में मिलते

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जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी
वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते

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छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो
ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो

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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है
ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी

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'साग़र-ए-इश्क़' अपने मूल में प्रेम के नशे से भरे प्याले की छवि उत्पन्न करता है। यह शब्द भावनाओं के उफान का आभास देता है, जहाँ प्रेम एक स्वादिष्ट पेय और इंद्रियों को अभिभूत करने वाला अमृत दोनों है। कविता में, इस शब्द का विस्तार प्रेम की गहराई और तीव्रता को दर्शाने के लिए किया गया है, अक्सर प्रेम को एक दिव्य अमृत के रूप में चित्रित किया जाता है।

'साग़र-ए-इश्क़' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम की प्रबलता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह रोमांस के नशीले आकर्षण का रूपक है। यह शब्द एकतरफा प्रेम की खालीपन के विपरीत, परस्पर स्नेह की समृद्धि को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'साग़र-ए-इश्क़' प्रेम की नशीली शक्ति का एक शाश्वत प्रतीक बना रहता है। यह पाठकों को जुनून की गहराइयों में डूबने के लिए आमंत्रित करता है।