Meaning of

सौम

saum • صوم

उपवास; संयम

fasting; abstinence

روزہ; پرہیز

Arabic

तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है

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मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है

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मैं ख़ुद भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ
कोई मासूम क्यूँ मेरे लिए बदनाम हो जाए

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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हम सेे जो रूठ गया है वो है बहुत मासूम
हम तो औरों को मनाने के लिए निकले है

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हम ने जिस मासूम परी को अपने दिल की जाँ बोला था
उस ने हम को धोखा देकर और किसी को हाँ बोला था

सारे वादे भूल गई तुम कोई बात नहीं जानेमन
लेकिन ये कैसे भूली तुम मेरी माँ को माँ बोला था

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मेरी कोशिश तो यही है कि ये मासूम रहे
और दिल है कि समझदार हुआ जाता है

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जो उन मासूम आँखों ने दिए थे
वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ

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ज़माना देखता है बस ज़माने की निग़ाहों से
भरी महफ़िल में क्यूँँ मासूम को बदनाम करता है

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तुम्हें कुछ भी नहीं मालूम लोगों
फ़रिश्तों की तरह मासूम लोगों

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तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है

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मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है

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'सौम' शब्द आत्म-अनुशासन और पवित्रता की भावना को जगाता है। कविता में, यह अक्सर आत्म-संयम और आंतरिक चिंतन की यात्रा का प्रतीक होता है, जहाँ उपवास का भौतिक कार्य गहरी आध्यात्मिक खोजों का रूपक बन जाता है।

कवि 'सौम' का उपयोग बलिदान और भक्ति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह आत्मा की मौनता, हृदय की शांति, या दिव्य संबंध की लालसा का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

'सौम' की शांति में, यह हृदय के भीतर गूंजने वाली गहरी मौनता की बात करता है, एक मौन जो शरण भी है और रहस्योद्घाटन भी।