Meaning of

शा़न

shaan • شان

गरिमा; भव्यता; महिमा

dignity; grandeur; majesty

شان; عظمت; جلال

Arabic

वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ
बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ

54

Download Image

सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं
पेड़ का रूप धार लूँगा मैं

तू निशाने पे आ भी जाए अगर
कौन सा तीर मार लूँगा मैं

192

Download Image

मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना

126

Download Image

ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए
बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए

101

Download Image

नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं
जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं

82

Download Image

उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी
फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी

मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में
और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी

67

Download Image

परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के
वफ़ा करने की नौबत आ गई है

65

Download Image

तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ
ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने

तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें
तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने

62

Download Image

नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं

61

Download Image

रखते हैं मोबाइल में मोहब्बत की निशानी
अब फूल किताबों में छुपाया नहीं करते

56

Download Image

वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ
बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ

54

Download Image

सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं
पेड़ का रूप धार लूँगा मैं

तू निशाने पे आ भी जाए अगर
कौन सा तीर मार लूँगा मैं

192

Download Image

'शा़न' शब्द गरिमा और भव्यता की भावना को समेटे हुए है। कविता में, यह प्रकृति की भव्य आभा, आत्मा की महानता, और मौन शक्ति को उजागर करता है जो सम्मान का आदेश देती है।

कवि अक्सर 'शा़न' का उपयोग परिदृश्यों की शाही सुंदरता या किसी चरित्र की आंतरिक महिमा को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विपरीत है, गर्व और अनुग्रह के बीच संतुलन को उजागर करता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'शा़न' महान और भव्य का उत्सव है। यह हमें गरिमा की मौन शक्ति की याद दिलाता है।