Meaning of

सुख़

sukh • سکھ

खुशी; शांति

happiness; peace

خوشی; سکون

Sanskrit

मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ
साँस लेना भी शा'इरी है मुझे

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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और

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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

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वो हिंदू, मैं मुस्लिम, ये सिक्ख, वो ईसाई
यार ये सब सियासत है चलो इश्क़ करें

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सुख़न का जोश कम होता नहीं है
वगरना क्या सितम होता नहीं है

भले तुम काट दो बाज़ू हमारे
क़लम का सर क़लम होता नहीं है

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हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैं
तेरे नगर के सुख़न-वर ही और होते हैं

तुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्त
डुबोने वाले समुंदर ही और होते हैं

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आप अपने से हम-सुख़न रहना
हमनशीं साँस फूल जाती है

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लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर
आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर

क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए
तुम से ही सीखा था हम ने दिल दुखाने का हुनर

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मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ
साँस लेना भी शा'इरी है मुझे

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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

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'सुख' शब्द संतोष और शांति के सार का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर मानव अस्तित्व के अंतिम लक्ष्य का प्रतिनिधित्व करता है, एक आंतरिक शांति और पूर्णता की स्थिति।

कवि 'सुख' का उपयोग एक अच्छी तरह से जीए गए जीवन की शांत सुंदरता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह साधारण सुखों में पाई जाने वाली खुशी या आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से प्राप्त शांति का प्रतीक हो सकता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'सुख' उस सामंजस्य की एक कोमल याद दिलाता है जो भीतर है और वह आनंद जो जीवन प्रदान कर सकता है।