Meaning of

तारीकी-ए-दिल

tareeki-e-dil • خیرو

दिल की अंधकार; उदासी

darkness of the heart; melancholy

دل کی تاریکی; اداسی

Arabic

छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो
ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो

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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है
ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी

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हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब
उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं

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ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

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बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के
आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को

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यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई
बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं

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अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा
कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा

रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख
झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा

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सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था
देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया

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महल में नहीं गर तो बस्ती में मिलते
हक़ीक़त नहीं तो कहानी में मिलते

ये सर्दी तो तब भारी सर्दी में गिनते
तेरे बाल जब मेरी जर्सी में मिलते

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जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी
वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते

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छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो
ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो

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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है
ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी

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‘तारीकी-ए-दिल’ एक गहरे आंतरिक अंधकार का आभास कराता है, जो दिल पर छाया रहता है। कविता में, यह अंधकार केवल प्रकाश की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि गहरे दुःख और आत्मचिंतन की उपस्थिति है।

कवि अक्सर ‘तारीकी-ए-दिल’ का उपयोग हानि, लालसा और अस्तित्व के शून्य के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रकाश और आशा के शब्दों के साथ विपरीतता बनाता है, जो एक मार्मिक तनाव उत्पन्न करता है।

दिल की छायाओं में, कविता अपनी सबसे भूतिया गूंजें पाती है।