Meaning of

तुयूर-ए-ख़ुश-आहंग

tuyoor-e-khush-aahang • خیرو

मधुर ध्वनि के पक्षी; सुरम्य पक्षी

birds of sweet melody; harmonious birds

شیریں نغمہ کے پرندے; ہم آہنگ پرندے

Persian

छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो
ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो

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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है
ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी

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हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब
उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं

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ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

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बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के
आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को

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यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई
बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं

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अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा
कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा

रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख
झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा

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सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था
देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया

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महल में नहीं गर तो बस्ती में मिलते
हक़ीक़त नहीं तो कहानी में मिलते

ये सर्दी तो तब भारी सर्दी में गिनते
तेरे बाल जब मेरी जर्सी में मिलते

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जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी
वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते

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छोड़ जाओ मुझे आइना देख लो
ख़ूब-सूरत नहीं एक ग़द्दार हो

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हम ऐसा कहने वाले जब तलक है
ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी

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मूल अर्थ में, यह वाक्यांश उन पक्षियों की छवि प्रस्तुत करता है जिनकी ध्वनि मधुर और सुरम्य होती है। कविता ने इसे प्रकृति में पाई जाने वाली सुंदरता और सामंजस्य का प्रतीक बना दिया है, जो अक्सर आत्मा की आंतरिक शांति या आनंद को दर्शाता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग प्रकृति की शांत सुंदरता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह हृदय की पवित्रता और मासूमियत का भी प्रतीक हो सकता है। कभी-कभी, यह मानव जीवन की अराजकता के विपरीत होता है, शांति की लालसा को उजागर करता है।

यह वाक्यांश शांति का सार और जीवन में सामंजस्य की अनंत खोज को पकड़ता है।