Meaning of

विर्द

vird • ورد

जप; पुनरावृत्ति

recitation; repetition

ورد; تکرار

Arabic

दौर था कोई ज़मीर-ओ-वर्द का इंसानियत का
वर्द अब सब लोभ के हैं मश्ग़ला क्या झूठ क्या सच

मसअला क़ैद-ए-हवस का और मसाइल जिस्म के हों
फिर भला क्या हासिल-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा क्या झूठ क्या सच

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उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से

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इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हम ने हौसले परवरदिगार के

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क़दर कर लो ज़रा वरना तरस जाओगे मिलने को
जब आएगी ख़बर तुम तक कि अब तो मर गया 'वर्धन'

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बस तेरे नाम का करता हूँ मैं कसरत से व्रिद
सिवा नुक़सान के इस अम्ल में क्या रक्खा है

बिन पिए रहते हैं मदहोशी के आलम में हम
वाक़ई दोस्त मुहब्बत में मज़ा रक्खा है

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विर्द ये बार-बार करती हूँ
जान तुझ पे निसार करती हूँ

मैं शजर अपने आप से बढ़ के
बा ख़ुदा तुझ सेे प्यार करती हूँ

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मेरे इस जन्म-दिन पर मौत भी हैरान है यारों
न जाने कब तलक ज़िंदा रहेगा दर्द में वर्धन

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परवरदिगार आप के सब फैसले अजीब हैं
जो तंग था वो तंग है जो ठीक था वो मर गया

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किसी की शक़्ल में पत्थर तराश लेने से
ऐ अहमखों कहाँ परवरदिगार बनता है

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मैं सब कुछ जानता हूँ आप के बारे में बर-ख़ुर्दार
बहुत डर जाते हैं वो जब भी मैं ये बात कहता हूँ

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दौर था कोई ज़मीर-ओ-वर्द का इंसानियत का
वर्द अब सब लोभ के हैं मश्ग़ला क्या झूठ क्या सच

मसअला क़ैद-ए-हवस का और मसाइल जिस्म के हों
फिर भला क्या हासिल-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा क्या झूठ क्या सच

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उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से

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'विर्द' शब्द मूल रूप से शब्दों या वाक्यांशों को दोहराने की क्रिया को दर्शाता है, अक्सर एक आध्यात्मिक या ध्यानात्मक संदर्भ में। कविता में, यह एक लयबद्ध, लगभग सम्मोहक गुण का सुझाव देता है, जहां पुनरावृत्ति भावनात्मक गूंज को गहरा करने का साधन बन जाती है।

कवि 'विर्द' का उपयोग मंत्र-जैसी पुनरावृत्ति के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं, चाहे वह प्रेम में हो, लालसा में, या आध्यात्मिक भक्ति में। यह विचारों या भावनाओं के अंतहीन चक्र को प्रकट कर सकता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'विर्द' निरंतरता और भक्ति का प्रतीक बन जाता है। यह जीवन की लय के सामने दृढ़ता के सार को पकड़ता है।