Meaning of

ज़ानी

zaani • زانی

व्यभिचारी; पापी

adulterer; sinner

زانی; گناہگار

Arabic

कितना मुश्किल है ये ख़ुद को पहले सा करना
जैसे सूखे हुए पत्तों को फिर से हरा करना

ऐब मिरा बतलाने वाले तेरा शुक्राना
पर अपनी ज़ानिब भी कभी तो आईना करना

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तुझे ख़याल नहीं है सो हम बढ़ा रहे हैं
फिर इक दफ़ा तेरी ज़ानिब क़दम बढ़ा रहे हैं

बहुत से आए तुझे जीतने की ख़्वाहिश में
हम एक कोने में बैठे रक़म बढ़ा रहे हैं

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अभी वो लौट कर आया नहीं काबे कि ज़ानिब से
मिला था गांँव के हद पर करी बातें कवाकिब से

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मेरी ज़ानिब देख रहे हैं वो कब से
जाने किस को देख रहे हैं वो मुझ
में

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यहाँ लोगों ने मीज़ानें ग़लत चुन रक्खे हैं वरना
ख़ुदा ने तो हर इक इंसाँ मुकम्मल ही बनाया है

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कितना मुश्किल है ये ख़ुद को पहले सा करना
जैसे सूखे हुए पत्तों को फिर से हरा करना

ऐब मिरा बतलाने वाले तेरा शुक्राना
पर अपनी ज़ानिब भी कभी तो आईना करना

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तुझे ख़याल नहीं है सो हम बढ़ा रहे हैं
फिर इक दफ़ा तेरी ज़ानिब क़दम बढ़ा रहे हैं

बहुत से आए तुझे जीतने की ख़्वाहिश में
हम एक कोने में बैठे रक़म बढ़ा रहे हैं

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'ज़ानी' शब्द एक भारी नैतिक भार वहन करता है, जो अक्सर अपराध और नैतिक विफलता से जुड़ा होता है। कविता में, यह अपराधबोध, पछतावा और व्यक्तिगत कार्यों के सामाजिक परिणामों के विषयों को उजागर कर सकता है।

कवि 'ज़ानी' का उपयोग मानव स्वभाव के अंधेरे पहलुओं की खोज के लिए कर सकते हैं। यह उन पात्रों के आंतरिक संघर्ष का प्रतीक हो सकता है जो नैतिक मार्गों से भटक गए हैं, अक्सर पाप और मोक्ष पर गहरे चिंतन की ओर ले जाते हैं।

काव्यिक क्षेत्र में, 'ज़ानी' पाप, अपराधबोध और मोक्ष की खोज के जटिल अंतःक्रिया को दर्शाने वाला एक दर्पण है।