Meaning of

ज़फ़र

zafar • ظفر

विजय; जीत

victory; triumph

فتح; کامیابی

Arabic

कर चुके हम बिहार से तौबा
भाड़ में जाए अब मुज़फ़्फ़रपुर

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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है

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मौत के साथ हुई है मिरी शादी सो 'ज़फ़र'
उम्र के आख़िरी लम्हात में दूल्हा हुआ मैं

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मुझे मालूम है दुनिया मुझे कब तक पुकारेगी
किराए के मकानों में कभी ज़ीनत नहीं मिलती

तो फिर जन्नत हक़ीक़त में नहीं है मान ले ज़ाहिद
हमारे साथ रह कर भी अगर जन्नत नहीं मिलती

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कौन डूबेगा किसे पार उतरना है 'ज़फ़र'
फ़ैसला वक़्त के दरिया में उतर कर होगा

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उस पे पत्थर खा के क्या बीती 'ज़फ़र' देखेगा कौन
फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्म-ए-शजर देखेगा कौन

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यूँँ पतंगों की तरह जो उड़ रहा है तू 'ज़फ़र'
जब गिरेगा फ़र्श पे तब होश आएगा तुझे

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लड़ाकर हरे को वो भगवे से देखो
जफर अब कबूतर उड़ाने लगा है

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बात अब तीर की तरह होगी
शा'इरी मीर की तरह होगी

है फ़साना ज़फ़र का राँझा सा
दास्ताँ हीर की तरह होगी

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ऐ रज़ा कुछ लड़कियाँ जो घर की ज़ीनत थीं कभी
रौनक़-ए-बाज़ार होती जा रही हैं आज कल

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कर चुके हम बिहार से तौबा
भाड़ में जाए अब मुज़फ़्फ़रपुर

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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है

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ज़फ़र विजय की मधुरता को दर्शाता है, एक ऐसा विजय क्षण जो व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों होता है। कविता में, यह अक्सर संघर्ष के समापन और बाधाओं को पार करने की खुशी को दर्शाता है।

कवि 'ज़फ़र' का उपयोग सफलता के क्षणों और उन्हें प्राप्त करने के लिए आवश्यक दृढ़ता का जश्न मनाने के लिए करते हैं। यह आशा और पूर्ति का शब्द है, जो अक्सर निराशा के विपरीत होता है।

ज़फ़र आशा का एक प्रकाशस्तंभ है, जो क्षितिज के परे प्रतीक्षा कर रही विजयों की याद दिलाता है।