Meaning of

ज़हाँ

zahaan • جہاں

दुनिया; ब्रह्मांड; क्षेत्र

world; universe; realm

دنیا; کائنات; عالم

Persian

हमारा दिल जहाँ जा कर लगा है
नहीं मालूम उस का क्या पता है

कि जिस सेे इश्क़ हम करते रहे हैं
उसी के बिन हमें रहना पडा़ है

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मिलता नहीं जहाँ में कोई काम ढंग का
इक इश्क़ था सो वो भी कई बार कर चुके

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अदब वाले अदब की महफ़िलें पहचान लेते हैं
उन्हें तुम प्यार से कुछ भी कहो वो मान लेते हैं

जहाँ तक देख सकते हैं वहाँ तक सुन नहीं सकते
मगर जब इश्क़ हो जाए तो धड़कन जान लेते हैं

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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता

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हम तुझे भूल न पाए तो बिखर जाएँगे
साथ गर तेरा न मिल पाया तो मर जाएँगे
इश्क़ इक जंग है जो जीतने की ख़ातिर हम
इस जहाँ के किसी मैदाँ में उतर जाएँगे

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वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं
मगर बात करने को जी चाहता है

जहाँ इश्क़ में डूब कर रह गए हैं
वहीं फिर उभरने को जी चाहता है

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हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए

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इश्क़ को अच्छा न समझा इस जहाँ ने
जब भी देखा तो बुरी नज़रों से देखा

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बरबस तेरी ओर ध्यान चला जाता है
और फिर मेरा ईमान चला जाता है

है इश्क़ वही स्टेशन कि जहाँ पर यारों
सो गए गर तो सामान चला जाता है

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आप के जाते ही हम पर कई असरार खुले
अपने बेगाने खुले इश्क़ खुला यार खुले

हम को खुलना था जहाँ खुल न सके हम वहीं पर
और जहाँ खुलना न था हम वहीं हर बार खुले

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हमारा दिल जहाँ जा कर लगा है
नहीं मालूम उस का क्या पता है

कि जिस सेे इश्क़ हम करते रहे हैं
उसी के बिन हमें रहना पडा़ है

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मिलता नहीं जहाँ में कोई काम ढंग का
इक इश्क़ था सो वो भी कई बार कर चुके

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'ज़हाँ' का मूल अर्थ दुनिया या ब्रह्मांड की विशालता से है। कविता में इस शब्द को अस्तित्व की असीमता, अनंत संभावनाओं और सभी क्षेत्रों की परस्पर संबंधता को व्यक्त करने के लिए अपनाया गया है।

कवि अक्सर 'ज़हाँ' का उपयोग सार्वभौमिकता और मानव स्थिति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह भौतिक दुनिया और आध्यात्मिक क्षेत्र दोनों का संकेत दे सकता है। यह उन शब्दों के विपरीत है जो सीमितता या बंधन को दर्शाते हैं।

कविता में, 'ज़हाँ' अनंत और शाश्वत की खोज के लिए एक कैनवास बन जाता है।