Meaning of

ज़माल

zamaal • جمال

सुंदरता; शालीनता

beauty; elegance

خوبصورتی; نزاکت

Arabic

हुस्न-ओ-जमाल उस का मुकम्मल ग़ज़ल सा है
इक तिल है रुख़ पे जैसे कि नुक़्ता लगा हुआ

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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है

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ख़ुद जिसे मेहनत मशक़्क़त से बनाता हूँ 'जमाल'
छोड़ देता हूँ वो रस्ता आम हो जाने के बा'द

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आ देख कि मेरे आँसुओं में
ये किस का जमाल आ गया है

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ज़रा विसाल के बा'द आइना तो देख ऐ दोस्त
तिरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई

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तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन
ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं

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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
हुईं जिस पे तेरी नवाज़िशें वो बहार बन के सँवर गया

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दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में
इक आईना था टूट गया देख-भाल में

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उस को देखा तभी ख़ुदा ने लफ़्ज़ जमाल ईजाद किया
वो बोली तो बहरो ने भी सुन-सुन कर इरशाद किया

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कभी तो आ जाए कोई एक साल मेरा
कि जिस में बेहतर हो ये मलूल हाल मेरा

कहीं मुसव्विर को भूल तो नहीं बैठा
ये जो है वहम-ए-ज़ेबाई-ओ-जमाल मेरा

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हुस्न-ओ-जमाल उस का मुकम्मल ग़ज़ल सा है
इक तिल है रुख़ पे जैसे कि नुक़्ता लगा हुआ

7

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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है

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'ज़माल' मूल रूप से सुंदरता के शुद्धतम रूप को दर्शाता है, एक ऐसा सौंदर्य जो इंद्रियों को मोहित करता है। कविता में, यह भौतिकता से परे जाकर शालीनता, आकर्षण और आत्मा के अलौकिक गुणों को समाहित करता है।

कवि 'ज़माल' का उपयोग सुंदरता के शाश्वत आकर्षण को जागृत करने के लिए करते हैं। यह आदर्श, अप्राप्य, या अस्तित्व के दिव्य पहलू का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

'ज़माल' में, सुंदरता अपनी आवाज़ पाती है, जो दिल की गहरी इच्छाओं से बात करती है।