Meaning of

ज़र्द

zard • زرد

पीला; फीका; म्लान

yellow; pale; sallow

پیلا; زرد; ماندہ

Persian

गुल की ये ज़र्द चादर ऐसे बिछा रखी है
सारे ज़मीं को जैसे हल्दी लगा रखी है

तितली का रक़्स फिर वो भँवरे की नर्म गुफ़्तन
सरसों के खेत ने ये महफ़िल सजा रखी है

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सर्दी में दिन सर्द मिला
हर मौसम बे-दर्द मिला

ऊँचे लम्बे पेड़ों का
पत्ता पत्ता ज़र्द मिला

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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे

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चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी

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अज़ कबीर-ओ-रंग-ए-केसर और गुलाल
अब्र छाया है सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल

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मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की

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मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर
सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है

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ज़र्द पत्तों पे शाम आती है
चाँदनी मेरा दिल दुखाती है

मैं उसे रोज़ याद करता हूँ
वो मुझे रोज़ भूल जाती है

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तसव्वुर में तिरे अब इस लिए जाता नहीं हूँ मैं
तुझे ये हिचकियाँ कर दे न आज़ुर्दा तिरे घर में

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तिरी गलियाँ तिरे क़स्बे को आए हैं
इक अरसे बा'द इस रस्ते को आए हैं

जो धुँदली हो गईं हैं ज़र्द के मारे
उन्हीं यादों से हम मिलने को आए हैं

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गुल की ये ज़र्द चादर ऐसे बिछा रखी है
सारे ज़मीं को जैसे हल्दी लगा रखी है

तितली का रक़्स फिर वो भँवरे की नर्म गुफ़्तन
सरसों के खेत ने ये महफ़िल सजा रखी है

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सर्दी में दिन सर्द मिला
हर मौसम बे-दर्द मिला

ऊँचे लम्बे पेड़ों का
पत्ता पत्ता ज़र्द मिला

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'ज़र्द' शब्द म्लानता और फीकेपन की छवि प्रस्तुत करता है। कविता में यह अक्सर समय के बीतने, यौवन के क्षीण होने या उदासी के आगमन का प्रतीक होता है। पीला रंग, जो कि चमकीला होता है, उसमें भी एक नाजुकता और अस्थिरता का भाव होता है।

कवि 'ज़र्द' का उपयोग पतझड़ के पत्तों की म्लान सुंदरता, प्रेमी के चेहरे की फीकी रंगत, या सांझ की धुंधली रोशनी को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह चटख रंगों के विपरीत क्षीणता में सुंदरता को उजागर करता है।

'ज़र्द' अपने मूक क्षीणता में उस सुंदरता का सार पकड़ता है जो क्षणिक और गहन दोनों है।