गुल की ये ज़र्द चादर ऐसे बिछा रखी हैसारे ज़मीं को जैसे हल्दी लगा रखी हैतितली का रक़्स फिर वो भँवरे की नर्म गुफ़्तनसरसों के खेत ने ये महफ़िल सजा रखी है— Arman Habib