Meaning of

ज़ुल्म

zulm • ظلم

उत्पीड़न; अत्याचार; अन्याय

oppression; tyranny; injustice

ظلم; جبر; ناانصافی

Arabic

तबक़ों में रंग-ओ-नस्ल के उलझा के रख दिया
ये ज़ुल्म आदमी ने किया आदमी के साथ

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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही

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ख़याल में भी उसे बे-रिदा नहीं किया है
ये ज़ुल्म मुझ सेे नहीं हो सका नहीं किया है

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डाली है ख़ुद पे ज़ुल्म की यूँँ इक मिसाल और
उस के बग़ैर काट दिया एक साल और

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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी

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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई

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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है

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इस गए साल बड़े ज़ुल्म हुए हैं मुझ पर
ऐ नए साल मसीहा की तरह मिल मुझ से

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ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा

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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ

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तबक़ों में रंग-ओ-नस्ल के उलझा के रख दिया
ये ज़ुल्म आदमी ने किया आदमी के साथ

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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही

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'ज़ुल्म' कठोरता और क्रूरता की भावना को व्यक्त करता है, जो अक्सर शक्ति के दुरुपयोग से जुड़ा होता है। कविता में, यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष और मानव आत्मा की दृढ़ता का एक शक्तिशाली प्रतीक बन जाता है।

कवि अक्सर 'ज़ुल्म' का उपयोग उत्पीड़ितों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए करते हैं। यह कार्रवाई के लिए एक आह्वान, न्याय के लिए एक पुकार, और स्थायी मानव आत्मा का एक प्रमाण है।

'ज़ुल्म' न्याय के लिए चल रहे संघर्ष की याद दिलाता है, हमें सतर्क और करुणामय बने रहने का आग्रह करता है।