khayal mein bhi use berida nahin kiya hai | ख़याल में भी उसे बे-रिदा नहीं किया है

  - Ali Zaryoun

ख़याल में भी उसे बे-रिदा नहीं किया है
ये ज़ुल्म मुझसे नहीं हो सका नहीं किया है

  - Ali Zaryoun

Yaad Shayari

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    फूल ही फूल याद आते हैं
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    ख़्वाब का ख़्वाब हक़ीक़त की हक़ीक़त समझें
    ये समझना है तो फिर पहले तरीक़त समझें

    मैं जवाबन भी जिन्हें गाली नहीं देता वो लोग
    मेरी जानिब से इसे ख़ास मोहब्बत समझें

    मैं तो मर कर भी न बेचूँगा कभी यार का नाम
    आप ताजिर हैं नुमाइश को इबादत समझें

    मैं किसी बीच के रस्ते से नहीं पहुँचा यहाँ
    हासिदों से ये गुज़ारिश है रियाज़त समझें

    मेरा बे-साख़्ता-पन उन के लिए ख़तरा है
    साख़्ता लोग मुझे क्यूँ न मुसीबत समझें

    फेसबुक वक़्त अगर दे तो ये प्यारे बच्चे
    अपने ख़ामोश बुज़ुर्गों की शिकायत समझें

    पेश करता हूँ मैं ख़ुद अपनी गिरफ़्तारी 'अली'
    उन से कहना कि मुझे ज़ेर-ए-हिरासत समझें
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    Ali Zaryoun
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    ज़ने हसीन थी और फूल चुन कर लाती थी
    मैं शेर कहता था, वो दास्ताँ सुनाती थी

    अरब लहू था रगों में, बदन सुनहरा था
    वो मुस्कुराती नहीं थी, दीए जलाती थी

    "अली से दूर रहो", लोग उससे कहते थे
    "वो मेरा सच है", बहुत चीख कर बताती थी

    "अली ये लोग तुम्हें जानते नहीं हैं अभी"
    गले लगाकर मेरा हौसला बढ़ाती थी

    ये फूल देख रहे हो, ये उसका लहजा था
    ये झील देख रहे हो, यहाँ वो आती थी

    मैं उसके बाद कभी ठीक से नहीं जागा
    वो मुझको ख्वाब नहीं नींद से जगाती थी

    उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था
    ये बात मुझसे ज़्यादा उसे रूलाती थी

    मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी "अली"
    कि उसको देखकर बस अपनी याद आती थी
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    Ali Zaryoun
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