ek bakse mein paik hokar bhi | एक बक्से में पैक होकर भी

  - Kushal "PARINDA"

एक बक्से में पैक होकर भी
लौटने की क़सम निभाते हैं

  - Kushal "PARINDA"

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    तेरी यादों का फिर सफ़र निकला
    दिल के वीराँ से इक शरर निकला

    चाँदनी तक थी सोज़ में डूबी
    जब तेरा ज़िक्र दर-बदर निकला

    हर तसव्वुर में तुझ को ही देखा
    फिर भी कोई न हमसफ़र निकला

    ज़ख़्म मुस्कान में बदलते गए
    तेरा अंदाज़ इस क़दर निकला

    इश्क़ में जब क़दम बढ़ा बैठे
    हर क़दम पर ही इक ख़तर निकला

    ख़्वाब जो आँखों में सजाए थे
    उनमें हर पल कोई असर निकला
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    Kushal "PARINDA"
    कहीं पर दूर दरिया के किनारों पर खड़े हैं हम
    तेरे दिल से निकाले, दर-बदर होकर खड़े हैं हम
    Kushal "PARINDA"
    बुराई का ज़माना वो बुराई करके मानेगा
    मेरा दिल भी तो पागल है खुदाई करके मानेगा

    उसे मंज़िल न भाएगी जुदाई करके मानेगा
    वो मानेगा नहीं सीधा लड़ाई करके मानेगा

    उजालों से कहो थोड़ी ठहर जाऍं पनाहों में
    अंधेरा ताज पहनाए रिहाई करके मानेगा

    वफ़ा को वो समझता है सज़ा की इक निशानी सी
    मगर इक दिन मोहब्बत की दुहाई करके मानेगा

    वो सच के साथ रह पाए ये मुमकिन ही नहीं लगता
    हक़ीक़त को भी झूठी वो गवाही करके मानेगा

    परिंदा कह रहा है अब दुआओं की ज़बाँ में सब
    ये दिल सब कुछ उसी की रस्म-दाई करके मानेगा
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    Kushal "PARINDA"
    किसी ने नर्क पाया है कोई जन्नत में जा बैठा
    किसी को मिल गई चौखट किसी को घर ने मारा है
    Kushal "PARINDA"
    वो तो सब बातों पर अब एहसान जताया करता है
    ख़ातिर जिसकी मैं ख़ुद को आबाद बताया करता था
    Kushal "PARINDA"

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