jiya mira hi pukaare kise bataaun main | जिया मिरा ही पुकारे किसे बताऊँ मैं

  - Manohar Shimpi

जिया मिरा ही पुकारे किसे बताऊँ मैं
वफ़ा निभा न सकी कैसे भूल जाऊँ मैं

सफ़र जुनून से ही था इसीलिए शायद
मिरे सनम न हुए वो किसे बताऊँ मैं

हसीं जवान दिलों की वो धड़कनें सारी
तिरी तरह वो मुझे है लगे सुनाऊँ मैं

रह-ए-वफ़ा से कहाँ ही चली सफ़र में मैं
मलाल ख़ूब उसी का हुआ छुपाऊँ मैं

कभी दिखे न दिखे 'इश्क़ की गली में जो
वफ़ा-शनास दिखे तो गली बताऊँ मैं

कली खिली न खिली फिर कली महकती है
उसी महक से कभी क्यूँ न मुस्कुराऊँ मैं

चराग़ बुत में शब-ओ-रोज़ सब जलाती हूँ
इसीलिए ही 'मनोहर' दिए बनाऊँ मैं

  - Manohar Shimpi

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