मुझ को तुम बे-वफ़ा समझते हो
ख़ैर कुछ तो भला समझते हो
इश्क़ तौफीक़ है मगर इक तुम
इश्क़ को मसअला समझते हो
हू-ब-हू 'जौन' की सी हालत है
जौन वो 'एलिया' समझते हो
खु़द को बर्बाद करना पड़ता है
इश्क़ का क़ाइदा समझते हो
कोई आ कर के ले गया उस को
या'नी कि तीसरा समझते हो
इश्क़ तुम को मज़ाक़ लगता है
तुम मोहब्बत को क्या समझते हो
— Meem Maroof Ashraf















