kuchh parindon ko to bas do chaar daane chaahiyein | कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ

  - Rajesh Reddy

कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ
कुछ को लेकिन आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ

दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त
रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ

तुम हक़ीक़त को लिए बैठे हो तो बैठे रहो
ये ज़माना है इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ

रोज़ इन आँखों के सपने टूट जाते हैं तो क्या
रोज़ इन आँखों में फिर सपने सजाने चाहिएँ

बार-हा ख़ुश हो रहे हैं क्यूँँ इन्ही बातों पे लोग
बार-हा जिन पे उन्हें आँसू बहाने चाहिएँ

  - Rajesh Reddy

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