meraa dil ab nahin lagta hai kisi dil ke saath | मेरा दिल अब नहीं लगता है किसी दिल के साथ

  - Raj Tiwari

मेरा दिल अब नहीं लगता है किसी दिल के साथ
ग़ालिबन जीना पड़ेगा इसी मुश्किल के साथ

वो मिरी पहली मुहब्बत थी उसे जाना था
आख़िरी रास्ता ही मिलता है मंज़िल के साथ

दरिया को देखा तो फिर हुस्न समझ आया मुझे
लहरें टिकती नहीं हैं दामन-ए-साहिल के साथ

वो जो बे-हिस था मुहब्बत की ग़ज़ल लिखने लगा
सोचिए कुछ तो हुआ होगा उस इक दिल के साथ

हवा के साथ चराग़ों का यूँँ जलते रहना
मरने वाला चले जैसे किसी क़ातिल के साथ

  - Raj Tiwari

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