दूरियाँ ख़त्म हुईं बात बढ़ाया कीजे
ऐ मेरी जान मेरे पास तो आया कीजे
एक मुद्दत मियाँ मैं इश्क़ की ज़द में ही था
दिल की दहलीज़ पे डरते हुए आया कीजे
मैं भी आदम हूँ कि मुझ को भी बुरा लगता है
मेरे मालिक मुझे इज़्ज़त से बुलाया कीजे
ज़िन्दगी भर का कहाँ साथ कोई लाया है
दो क़दम चार क़दम साथ निभाया कीजे
क्या हुई बात ये झुँझलाते हैं शरमाते हैं
मेरे शायर मेरे नज़दीक तो आया कीजे
सुनते आए हैं कि मुर्दों को झनक होती है
दिल की दहलीज़ से आवाज़ लगाया कीजे
कोई इक शे'र तुम्हारे लिए नाज़िल होगा
मेरे शायर यूँँ कभी दिल न दुखाया कीजे
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