हमें आपसे दिल लगाना नहीं है
मुहब्बत का कोई ठिकाना नहीं है
कभी वो हसीं गर मेरे घर भी आया
तो मैं ये कहूँगा कि जाना नहीं है
जो मैं ने कहा यूँँ मुहब्बत करेंगे
तो हँस के वो बोले निभाना नहीं है
तुम्हें कोई मुझ सेे ज़ियादा भी चाहे
सनम चाहतों का ज़माना नहीं है
हमें दिल लगाकर पता चल गया है
कभी दिल किसी से लगाना नहीं है
तुम्हें मयकशों की दु'आ लग गई है
तुम्हारा चलन काफ़िराना नहीं है
ग़ज़ल के मुकम्मल मआ'नी को समझो
ग़ज़ल का मुकम्मल तराना नहीं है
कि 'राकेश' तुम भी ग़ज़ब कर रहे हो
तुम्हें प्यार करना कराना नहीं है
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