फ़ासला हम में बस इतना रह गया
इश्क़ में हम से जताना रह गया
तू ने ग़ैरों की कही बातें सुनी
अपना सच हम से सुनाना रह गया
तुम ख़मोशी नइँ समझ पाए मेरी
मुँह ज़ुबानी मुझ से कहना रह गया
— Rizwan Khoja "Kalp"
इश्क़ में हम से जताना रह गया
तू ने ग़ैरों की कही बातें सुनी
अपना सच हम से सुनाना रह गया
तुम ख़मोशी नइँ समझ पाए मेरी
मुँह ज़ुबानी मुझ से कहना रह गया
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