बड़ा इतना भी हर्जाना नहीं होता
ये पहला प्यार अंजाना नहीं होता
गुज़रते हैं तुम्हारे शहर से अक्सर
तुम्हारे घर ही बस आना नहीं होता
मैं ख़ुश हूँ कम से कम वो साथ है मेरे
अमाँ सब कुछ उसे पाना नहीं होता
वो सखियों ने मनाई रस्म हल्दी की
ये पीला रंग बेगाना नहीं होता
मोहब्बत में सदा ख़ुद की नहीं चलती
ज़रा सा काम मनमाना नहीं होता
— Rudransh Trigunayat















