नज़ारों से जो हम गुज़रे तुम्हारी याद आती है
पहाड़ों से जो हम उतरे तुम्हारी याद आती है
कोई लटके दिखाए या कोई झटके दिखाए पर
दिखाए जब कोई नख़रे तुम्हारी याद आती है
दिखे कंगन दिखे काजल दिखे बिंदिया दिखे पायल
दिखे बाज़ार में गजरे तुम्हारी याद आती है
— Rudransh Trigunayat















