ख़बर तो काग़ज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको
ये लहरें ही तुम्हारी चिट्ठियाँ दे जाएँगी मुझको
कभी तो बात मेरी मान जाया कर दिल-ए-नादाँ
तेरी नादानियाँ दुश्वारियाँ दे जाएँगी मुझको
लिखे थे जो दरख़्तों पर अभी तक नाम हैं क़ाएम
ख़बर ये भी कभी पुरवाइयाँ दे जाएँगी मुझको
बिछड़ जाने का डर मुझको नहीं डर है तो ये डर है
न जाने क्या न क्या रुस्वाइयाँ दे जाएँगी मुझको
तुम्हीं को भूल जाऊँ मैं अजी ये हो नहीं सकता
तुम्हारी यादें आकर हिचकियाँ दे जाएँगी मुझको
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