jaane usne kya dekha shahar ke manaare men | जाने उसने क्या देखा शहर के मनारे में

  - Sarvat Husain

जाने उसने क्या देखा शहर के मनारे में
फिर से हो गया शामिल ज़िन्दगी के धारे में

इस्म भूल बैठे हम जिस्म भूल बैठे हम
वो हमें मिली यारो रात इक सितारे में

अपने अपने घर जा कर सुख की नींद सो जाएँ
तू नहीं ख़सारे में मैं नहीं ख़सारे में

मैं ने दस बरस पहले जिस का नाम रक्खा था
काम कर रही होगी जाने किस इदारे में

मौत के दरिंदे में इक कशिश तो है 'सरवत'
लोग कुछ भी कहते हों ख़ुद-कुशी के बारे में

  - Sarvat Husain

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