पैसा आता और जाता है

कौन किसी का क्या खाता है

बचपन यौवन और बुढ़ापा
जी कर बंदा मर जाता है

जिस दिन फोन नहीं करता वो
उस दिन ये दिल डर जाता है

कहने वाले कहते हैं बस
करने वाला कर जाता है

आगे बात बढ़े तो कैसे
वो यूँ इतना शर्माता है

आस लगाए बैठा हूँ वो
अब आता है अब आता है

— Sarvjeet Singh

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