hansta hai to har leta hai har peer hamaari | हँसता है तो हर लेता है हर पीर हमारी

  - Shakir Dehlvi

हँसता है तो हर लेता है हर पीर हमारी
इक शख़्स बदल देता है तासीर हमारी

रहते हैं ख़फ़ा हम से सभी ख़्वाब हमारे
ख़्वाबों से ख़फ़ा रहती है ता'बीर हमारी

दीदार की हसरत लिए आँखों में किसी दिन
दीवार पे लग जाएगी तस्वीर हमारी

आँखों से वो दे देता है जाने की इजाज़त
अश्कों को बना देता है ज़ंजीर हमारी

आँखों के किनारों पे वो काजल की लकीरें
वापस हमें रखनी पड़ी शमशीर हमारी

बाक़ी तो तेरा जिस्म ये तुझको ही मुबारक
हँसते हुए ये होंठ हैं जागीर हमारी

  - Shakir Dehlvi

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