Shakir Dehlvi

Shakir Dehlvi

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Shakir Dehlvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shakir Dehlvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कहाँ हो राम आ कर देख तो लो तुम्हारे नाम पर क्या हो रहा है — Shakir Dehlvi
आप ख़ुद माँगेंगे इस के ख़त्म होने की दुआ बस तसव्वुर कीजिए दुनिया का औरत के बग़ैर — Shakir Dehlvi
क्या कहा याद आ रहा हूँ मैं फिर कोई छोड़ कर गया है क्या — Shakir Dehlvi
बा अदब बा मुलाहिज़ा सुनिए इश्क़ बिन ये अदब नहीं आता — Shakir Dehlvi
टूटें न उस के ख़्वाब सो आवाज़ दी नहीं ऐसा नहीं कि दर्द दोबारा नहीं हुआ — Shakir Dehlvi
ख़ामुशी दूरियाँ बढ़ाती है और बढ़ाती है बद-गुमानी भी — Shakir Dehlvi
ये साल भी रुख़्सत हुआ इक उम्र चुरा कर हम हैं कि उसे जाता हुआ देख रहे हैं — Shakir Dehlvi
ये जो तुम तल्ख़ियाँ लहजे में लिए फिरते हो सह न पाओगे मियाँ हम ने जो तेवर बदला — Shakir Dehlvi
ख़ूँ जला दो मेरा चराग़ों में रौशनी कम न हो ख़याल रहे — Shakir Dehlvi
हम सेे पूछें भरी बहार का दुख ये जो वीरानियों को रोते हैं — Shakir Dehlvi
आप को हासिल है साहब आप समझेंगे नहीं ज़िंदगी कैसे गुज़रती है मोहब्बत के बग़ैर — Shakir Dehlvi
हर भरम टूट गया साँस जो टूटी अपनी हम तो समझे थे कि हम से ही चलेगी दुनिया — Shakir Dehlvi
एक मज़लूम और इक ज़ालिम दो ही मज़हब हैं सारी दुनिया में — Shakir Dehlvi
सब के अंदर है इक अधूरापन सब के हिस्से में सब नहीं आता — Shakir Dehlvi
आप जैसों की दिल-लगी के लिए दिल हमारे बनाए जाते हैं — Shakir Dehlvi
अभी चुभता हूँ आँखों में तुम्हारी दु'आओं में मुझे माँगा करोगे — Shakir Dehlvi
अना का पास रखेगा वो सामने मेरे वो शख़्स जाके कहीं मुझ सेे दूर टूटेगा — Shakir Dehlvi
मैं उन की क्या से क्यूँँ से लड़ रहा हूँ वो मेरी हाॅं से हूँ से लड़ रहे हैं — Shakir Dehlvi
इक अधूरा ख़्वाब जो अक्सर डराता था मुझे तेरा जाना उस अधूरे ख़्वाब की ता'बीर है — Shakir Dehlvi
आरज़ी तेरी तरह तेरी हर इक शय निकली ज़िन्दगी छोड़ भी जा तेरा हुनर देख लिया — Shakir Dehlvi

Ghazal

है अज़ल से जिस का दुश्मन ये ज़माना इश्क़ है हर तरफ़ क़ातिल निगाहें और निशाना इश्क़ है देख कर मुझ को तुम्हारा मुस्कुराना इश्क़ है और ज़रा सी बात पर फिर रूठ जाना इश्क़ है पहले खो देना उसे अपनी अना के वास्ते फिर उसी की याद में दिल को जलाना इश्क़ है दो मुलाक़ातें हुई हैं और वो भी मुख़्तसर लग रहा है मुझ को यूँँ सदियों पुराना इश्क़ है जब भी मिलते हैं तो करते हैं ग़ज़ल पर गुफ़्तगू उस के मेरे दरमियाँ इक शाइराना इश्क़ है जब मदद साहिल पे हो बस इक सदा की मुंतज़िर ऐसे में ख़ामोश रह कर डूब जाना इश्क़ है चैन दिन का नींद रातों की और इस दिल का सुकूँ सब गँवा कर जो मिला हम को ख़ज़ाना इश्क़ है मुद्दतों के बा'द वो हम सेे मिला और यूँँ मिला कह उठे सब देखने वाले पुराना इश्क़ है — Shakir Dehlvi
कर लिए लाख जतन फिर भी न मंज़र बदला जब मेरी माँ ने दुआ दी तो मुक़द्दर बदला एक मुद्दत हुई दोनों ही अड़े हैं ज़िद पर प्यास हारी है मेरी और न समुंदर बदला मेरी लाचारी का उस ने भी सदा मान रखा या'नी बदला है सितम और न सितमगर बदला और बस चंद क़दम दूर थी मंज़िल अपनी तू भी ऐ दोस्त ये किस मोड़ पे आ कर बदला ये जो तुम तल्ख़ियाॅं लहजे में लिए फिरते हो सह न पाओगे मियाॅं हम ने जो तेवर बदला रोज़ तारीख़ कैलेंडर में बदल जाती थी फिर वो तारीख़ भी आई कि कैलेंडर बदला उस ने हर बार ही कोशिश की बदलने की मुझे और मैं ने भी लिया उस को बदल कर बदला — Shakir Dehlvi