हर शब इक ख़्वाब सलोना भी
और धूप खिले तक सोना भी
बातों में उस की जाल भी है
आँखों में जादू टोना भी
क्या शय है मोहब्बत इस
में सुकूँ
देता है तड़पना रोना भी
दीदार का तालिब मैं ही नहीं
है घर का कोना कोना भी
पैदा करता है बेज़ारी
हर वक़्त मुयस्सर होना भी
— Shakir Dehlvi















