maut ka khauf li.e thokren khaate hue log | मौत का ख़ौफ़ लिए ठोकरें खाते हुए लोग

  - Shakir Dehlvi

मौत का ख़ौफ़ लिए ठोकरें खाते हुए लोग
मर गए शहरस घर लौट के जाते हुए लोग

ये जो फुटपाथ पे सोते हैं वहीं जीते हैं
मर भी जाते हैं वहीं ख़्वाब सजाते हुए लोग

ऊँची मसनद से दिखाई नहीं देते शायद
भूख से राह में दम तोड़ते जाते हुए लोग

उसकी चाहत है कि सब होंठ सिये बैठे रहें
उसको भाते ही नहीं शोर मचाते हुए लोग

बस तेरी याद लिए दिल में चले जाते हैं
तेरी उम्मीद में इक उम्र गँवाते हुए लोग

अब ये ख़्वाहिश है कि इक बार मैं देखूँ फिर से
गाँव के नीम तले नाचते गाते हुए लोग

  - Shakir Dehlvi

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