तिरे सीने पे सर रक्खा हुआ है
बहुत आराम दिल को मिल रहा है
तुम्हें भी मिल गया कोई बहाना
हमारा दिल भी ख़ुद में लग गया है
निगह हम पे भी है रब की ज़रा सी
तुम्हारे साथ भी अच्छा हुआ है
पुकारा जाएगा अब बस उसी को
मिरी आवाज़ को जो सुन चुका है
रुका करते हैं सब अपने ही मन से
किसी को कोई याँ कब रोकता है
हमें भी दूर अब होना पड़ेगा
तुम्हारा भी तो ये ही फ़ैसला है
— shampa andaliib















