ब-ज़ाहिर तो उसे हमने भुला रक्खा हुआ है

  - Sultan Sukoon

ब-ज़ाहिर तो उसे हमने भुला रक्खा हुआ है
मगर दिल ने उसी से राब्ता रक्खा हुआ है

बिछड़ कर हम से वो ख़ुद भी बहुत होगा पशेमाँ
अभी इस ज़ो'म में दिल मुब्तिला रक्खा हुआ है

कशिश अब कोई भी रक्खी नहीं जीने में अपने
कि ये तो हमने अपना जी कड़ा रक्खा हुआ है

मसाइल इस क़दर दरपेश हैं अब ज़िंदगी ने
हमें तक़सीम कर के जा-ब-जा रक्खा हुआ है

पलट आए मेरे अहबाब फ़स्ल-ए-गुल की मानिंद
अभी ज़ख़्म-ए-त'अल्लुक़ को हरा रक्खा हुआ है

मैं खिल उठ्ठा 'सुकून' उस ने जो रस्मन मुझ से पूछा
ये तुमने हाल क्या अपना बना रक्खा हुआ है

  - Sultan Sukoon

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