RAAHI
RAAHI
Ghazal

मेरी शोहरत राम की है राम से है राम में है

सब मुहब्बत राम की है राम से है राम में है

वो तुम्हारा ये हमारा क्यूँ झगड़ना आपसी में
सारी दौलत राम की है राम से है राम में है

आप मैं सब क्या पता किस बात पे उलझे हुए हैं
सबकी बरकत राम की है राम से है राम में है

और कुछ कहना नहीं पर ये तो बोलो साथ मेरे
अपनी क़िस्मत राम की है राम से है राम में है

है नहीं साहस मुझे हनुमत सा छाती चीर लूँ मैं
पर इबादत राम की हैं राम से हैं राम में है

क्या कभी सोचा है तुम ने क्या है रामायण का निष्कर्ष
सारी ज़ीनत राम की है राम से है राम में है

सब से सुंदर बात ये है अपने अपने राम सबके
जग सदारत राम की है राम से है राम में है

राम के बस नाम से पत्थर नहीं डूबे नदी में
सब को हिम्मत राम की है राम से है राम में है

मैं ने केवल इतना जाना आज तक के तजरबे से
धर्म राहत राम की है राम से है राम में है

जल पवन पावक धरा अंबर मिलन से पंचतत्वों
को महारत राम की है राम से है राम में है

कर ज़रा उद्घोष मेरे साथ सब को तू बता दे
सब रियासत राम की है राम से है राम में है

— RAAHI

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