RAAHI
RAAHI
Ghazal

बात ये है कि मतला ग़लत हो गया

एक लड़की पे ख़र्चा ग़लत हो गया

सब यही कह रहे है सभी को यहाँ
हम सही ही थे अगला ग़लत हो गया

लिख फ़क़त ख़त चुरा ले गया है उसे
याद में शे'र लिखना ग़लत हो गया

प्यार में चाहते रंग गोरा सभी
जिस्म होना ये काला ग़लत हो गया

पास मेरे रखी ठीक चाभी ही थी
घर का शायद से ताला ग़लत हो गया

मैं नज़र में रक़ीबों के जो आ गया
फिर वहाँ यार जाना ग़लत हो गया

— RAAHI

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