अश्क आँखों को पिलाए जाते हैं
मुस्कुरा कर ग़म छिपाए जाते हैं
मर चुके होते हैं पहले ही वो लोग
ख़ुद-कुशी से जो बचाए जाते हैं
देख मय-ख़ाने में जा कर तू कभी
रोज़ कितने दिल दुखाए जाते हैं
— ABhishek Parashar
मुस्कुरा कर ग़म छिपाए जाते हैं
मर चुके होते हैं पहले ही वो लोग
ख़ुद-कुशी से जो बचाए जाते हैं
देख मय-ख़ाने में जा कर तू कभी
रोज़ कितने दिल दुखाए जाते हैं
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