yuñ nahin banti shaayari mujh men | यूँँ नहीं बनती शाइरी मुझ में

  - Viru Panwar

यूँँ नहीं बनती शाइरी मुझ में
हैं बहुत बातें अन-कही मुझ में

कैसे मैं आ गया पसंद उस को
बात ऐसी तो कुछ न थी मुझ में

मैं रहा ख़ुद में इतना कम मौजूद
हो गई अपनी ही कमी मुझ में

उस के जाते ही हो गई सुनसान
दिल मोहल्ले की वो गली मुझ में

साँस लेने की ज़िंदा रहने की
कोई करता था नौकरी मुझ में

हँसते हँसते भी आँसू आते थे
यार इतनी उदासी थी मुझ में

  - Viru Panwar

More by Viru Panwar

As you were reading Shayari by Viru Panwar

Similar Writers

our suggestion based on Viru Panwar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari