यूँँ नफ़रतों के अँधेरे मिटा दिए जाएँ
चराग़ अम्न के यारों जला दिए जाएँ
जहाँ हुनर पे नहीं करतबों पे शैदा है
चलो फिर उन को तमाशे बता दिए जाएँ
ख़्याल बन के ज़माने को याद आएँगे
हम ऐसे लोग कहाँ जो भुला दिए जाएँ
वो खा़र बाँटने आएँगे चल के फूलों पे
तमाम शहर के रस्ते सजा दिए जाएँ
निशानी उन की कोई पास क्यूँ रहे साहिल
चलो फिर उन के सभी ख़त जला दिए जाएँ
— Wajid Husain Sahil















