ख़ूबसूरत प्यार की ही ये कहानी है बस
ताज दुनिया में मोहब्बत की निशानी है बस
मक़बरा तो मक़बरा ही मान लो तुम इसको
क़ब्र है मुमताज़ की अब तो बचानी है बस
सूखे शजरों की कहानी सुनो
ख़ुद उन्हीं की ही जुबानी सुनो
हम सुख़न-वर अब बहुत कम कहें
जब कहें तो तुम रवानी सुनो
नदियों की ही ये कहानी कहे
तुम कभी जो बहता पानी सुनो
जब शिकायत माँ की बेटे ने की
कुछ हमारी भी तो नानी सुनो
ठीक अब इतना गुरुर है नहीं
इस जहाँ में सब है फ़ानी सुनो
अब तुम्हारे पास होंगें कई
पर नहीं है मेरा सानी सुनो
शहर में पैदा ख़राबी हो गई है
नस्ल ये पूरी शराबी हो गई है
बाप ने जीवन गुज़ारा मुफ़्लिसी में
नस्ल पर उसकी नवाबी हो गई है
आदतें जब ख़राब होने लगी
हाथ में फिर शराब होने लगी
सिर्फ़ तुझसे हुई मोहब्बत हमें
और फिर बे-हिसाब होने लगी
दुनिया में ठीक था शुरू में सभी
दुनिया अब बे-नकाब होने लगी
ज़िन्दगी में बची नहीं रोशनी
फिर माँ इक आफ़ताब होने लगी
बोलना हर दफ़ा मुनासिब नहीं
कामयाबी जबाब होने लगी
की मोहब्बत मनोज ने जिससे अब
याद उसकी अज़ाब होने लगी
अब मैं किसी के हाथ में आता नहीं
इक हाथ से बस मैं निकल पाता नहीं
वो कह चुकी है तुम चले जाओ कहीं
वो शर्म हूँ मैं जो कहीं जाता नहीं
सूरत दिखा दी है उसी ने अब मुझे
चेहरा तभी कोई मुझे भाता नहीं
टूटा नहीं है दिल मेरा बस इसलिए
ग़ज़लें तरन्नुम में अभी गाता नहीं
मैं हो गया हूँ अब मुलाज़िम उसका ही
मेरा किसी से अब कोई नाता नहीं
बारिश कभी भी हो उसे है भीगना
छतरी लगा दूँ तो कहे छाता नहीं
पहला निवाला वो न खा ले जब तलक
खाना कभी मैं तब तलक खाता नहीं