ab main kisi ke haath men aata nahin | अब मैं किसी के हाथ में आता नहीं

  - Manoj Devdutt

अब मैं किसी के हाथ में आता नहीं
इक हाथ से बस मैं निकल पाता नहीं

वो कह चुकी है तुम चले जाओ कहीं
वो शर्म हूँ मैं जो कहीं जाता नहीं

सूरत दिखा दी है उसी ने अब मुझे
चेहरा तभी कोई मुझे भाता नहीं

टूटा नहीं है दिल मेरा बस इसलिए
ग़ज़लें तरन्नुम में अभी गाता नहीं

मैं हो गया हूँ अब मुलाज़िम उसका ही
मेरा किसी से अब कोई नाता नहीं

बारिश कभी भी हो उसे है भीगना
छतरी लगा दूँ तो कहे छाता नहीं

पहला निवाला वो न खा ले जब तलक
खाना कभी मैं तब तलक खाता नहीं

  - Manoj Devdutt

Dil Shayari

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