आदतें जब ख़राब होने लगी
हाथ में फिर शराब होने लगी
सिर्फ़ तुझ से हुई मोहब्बत हमें
और फिर बे-हिसाब होने लगी
दुनिया में ठीक था शुरू में सभी
दुनिया अब बे-नकाब होने लगी
ज़िन्दगी में बची नहीं रौशनी
फिर माँ इक आफ़ताब होने लगी
बोलना हर दफ़ा मुनासिब नहीं
कामयाबी जबाब होने लगी
की मोहब्बत मनोज ने जिस से अब
याद उस की अज़ाब होने लगी
— Manoj Devdutt















