Sachit Agrawal

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@Sachit_Agrawal

Sachit Agrawal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sachit Agrawal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

वक़्त भी अपने भीतर कितना बोझ लिए चलता होगा रिश्ता कोई भी टूटे इल्ज़ाम समय पर आता है — Sachit Agrawal
बारिश का पानी गुम-सुम है नाव नहीं बनती बच्चों से — Sachit Agrawal
मुझ को तलब तो जिस्म की थी ही नहीं अब दिल लगाने की भी हसरत मिट गई — Sachit Agrawal
शव बूढ़े पिताजी का काँपना ही था बेटे ने अरसे बा'द छुआ जो था — Sachit Agrawal
आता नहीं है घर में राशन इश्क़ से आशिक़ तभी तो नौकरी करने लगे — Sachit Agrawal
फ़िल्म हो या अस्लियत लड़का ही क्यूँ पगलाता है इश्क़ हो या जंग हो लड़का ही मारा जाता है — Sachit Agrawal

Ghazal

बात है उस की तो क्या ग़लत क्या सही इश्क़ में तुम कहो क्या ग़लत क्या सही तुम सही को सही और ग़लत को ग़लत जो नहीं कह सको क्या ग़लत क्या सही मर्द जो बन रहा बीवी को पीट कर कह रहा घर में वो क्या ग़लत क्या सही देख मकड़ी का जाला ये मैं ने कहा वास्ते रोज़ी को क्या ग़लत क्या सही भाई का कर के ख़ूँ भाई है कह रहा ये सियासत है तो क्या ग़लत क्या सही वेद गीता पुराणों में क्या है लिखा पंडितों ज्ञान दो क्या ग़लत क्या सही पहले तो मुझ सेे ही मशवरा ले लो तुम फिर मुझे तुम कहो क्या ग़लत क्या सही रात को क़त्ल कर के वो कानून का सुब्ह कहता सुनो क्या ग़लत क्या सही तुम तलाश-ए-मआनी में क्यूँ महव हो अर्ज़ है शेर-गो क्या ग़लत क्या सही वक़्त बदले तो सब ठीक करता 'सचित' बदला अब वक़्त तो क्या ग़लत क्या सही — Sachit Agrawal
कहीं भी ग़लती थी उस की नहीं थी अभी तक वो जवाँ भी थी नहीं थी सितारे चाँद धरती कुछ न थे ख़ास जहाँ में जब ग़ज़ल आई नहीं थी कोई अपना नहीं दुनिया में मेरा समझ आया ये जब माई नहीं थी पिता बेटे की फ़ितरत देख सोचे ये बेटा बोझ है बेटी नहीं थी वो जिस क्रीड़ा में ख़ुद को हार बैठी वो ख़ुद उस खेल को खेली नहीं थी पुकारा कृष्ण को कृष्णा ने बस फिर बदन से हटनी वो साड़ी नहीं थी मोहब्बत इश्क़ उल्फ़त सब कहाँ थे जहाँ में जब हवस आई नहीं थी तिरी वहशत बता देगी सभी को कभी तू ने मोहब्बत की नहीं थी उसे जाना था सो वो जा चुकी है मिरी आवाज़ पर रुकनी नहीं थी — Sachit Agrawal