मौत से लोग डर जाते हैं
ज़िंदा हो कर भी मर जाते हैं
उम्र का ये तक़ाज़ा है लोग
बे-तलब हो के घर जाते हैं
मर्द बच जाते हैं जंग से
पर मुहब्बत में मर जाते हैं
— Sachit Agrawal
ज़िंदा हो कर भी मर जाते हैं
उम्र का ये तक़ाज़ा है लोग
बे-तलब हो के घर जाते हैं
मर्द बच जाते हैं जंग से
पर मुहब्बत में मर जाते हैं
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